Petrol Diesel Price: कहीं विकास की राह को अग्निपथ न बना दे पेट्रोल-डीजल का बढ़ता भाव, जानें- क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

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अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो बजट ने जो चटख रंग दिखाए और पैकेज ने जो उत्साह जगाया उस पर तुषारापात हो सकता है। पिछले साल अप्रैल के मुकाबले पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में 30 फीसद की बढ़ोतरी हो चुकी है।

राजीव कुमार, नई दिल्ली। कोरोना काल के संकट से निकलकर इकोनॉमी राह पर आनी शुरू हुई नहीं कि पेट्रोलियम पदार्थो की बढ़ती कीमतों ने नया संकट खड़ा कर दिया है। यह वृद्धि ऐसे वक्त में हो रही है, जब महंगाई दर का बेकाबू होना पूरी रणनीति और मंशा पर पानी फेर सकता है। यह सच है कि देर सबेर सभी को विकल्प भी तलाशने होंगे, लेकिन फिलहाल जरूरत है इस विकराल संकट से बाहर आने की। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो बजट ने जो चटख रंग दिखाए और पैकेज ने जो उत्साह जगाया, उस पर तुषारापात हो सकता है। पिछले साल अप्रैल के मुकाबले पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में 30 फीसद की बढ़ोतरी हो चुकी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के दाम में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी से महंगाई दर बढ़ेगी, जिससे अन्य वस्तुओं की मांग में कमी आएगी, जो रिकवरी के इस दौर में अच्छी बात नहीं है। महंगाई बढ़ने से मैन्यूफैक्च¨रग में तेजी लाने के प्रयास भी प्रभावित होंगे। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो ऐसा खतरनाक चक्र पैदा होगा, जिससे आरबीआइ को नीतिगत दरों में वृद्धि के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसके चौतरफा नकारात्मक असर को थामना बहुत आसान नहीं होगा।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी कहते हैं, ‘पेट्रोलियम की बढ़ती कीमत से निश्चित रूप से महंगाई और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दोनों पर विपरीत असर पड़ेगा। लेकिन कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कीमत किस स्तर तक पहुंचेगी और कब तक ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी।’

वैश्विक मांग में मजबूती से पिछले साल नवंबर से कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है। इससे पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमत प्रभावित हो रही है। एचडीएफसी की वरिष्ठ अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा, ‘पेट्रोलियम की कीमतों में 10 फीसद की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर में 20 आधार अंक (0.2 फीसद) का इजाफा हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भार किस हद तक दूसरों पर डाला जाता है।’ उन्होंने बताया कि महंगाई दर अपने निचले स्तर से ऊपर निकल चुकी है। आने वाले महीनों में यह और बढ़ेगी। खुदरा महंगाई दर अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में पांच से साढ़े पांच फीसद तक रह सकती है। इस साल जनवरी में खुदरा वस्तुओं की महंगाई दर 4.06 फीसद रही थी।

आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसद की वार्षिक बढ़ोतरी से चालू खाते के घाटे में जीडीपी के 50 आधार अंक के बराबर की बढ़ोतरी हो जाती है। इससे राजकोषीय घाटे में इजाफा होगा, जो सरकार पर वित्तीय दबाव को बढ़ाता है।

पेट्रोलियम पर निर्भर है देश का 70 फीसद ट्रांसपोर्ट

क्रिसिल के डीके जोशी ने बताया कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से मैन्यूफैक्च¨रग की लागत बढ़ जाएगी, जो हमारी प्रतिस्पर्धा क्षमता को प्रभावित करेगी। देश का 70 फीसद ट्रांसपोर्ट पेट्रोलियम पर निर्भर करता है और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से इस पर असर पड़ेगा। छोटे उद्यमियों ने बताया कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत आने वाले समय में उनके लिए मुसीबत लाने वाली है। कच्चे माल की कीमत पहले से 25 से 70 फीसद तक बढ़ चुकी है। अर्थव्यवस्था में रिकवरी का दौर इन बढ़ती कीमतों से प्रभावित होगा, क्योंकि मैन्यूफैक्च¨रग की तीसरी सबसे बड़ी लागत ट्रांसपोर्ट एवं अन्य लॉजिस्टिक से जुड़ी होती है। इंटीग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज ऑफ इंडिया के चेयरमैन राजीव चावला ने कहा, ‘मैन्यूफैक्चरर्स का मार्जिन पहले से ही दबाव में है। यह दबाव और बढ़ने पर मैन्यूफैक्चरर्स कीमत बढ़ाएंगे, जिससे महंगाई बढ़ेगी।’

आवश्यक वस्तुओं की कीमतें होंगी तेज

आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक आवश्यक वस्तुओं की 90 फीसद ढुलाई सड़क मार्ग से होती है और डीजल के दाम बढ़ने से इनकी कीमत भी बढ़ेगी। जनवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 1.89 फीसद रही, लेकिन ढुलाई लागत बढ़ने से इसमें वृद्धि की आशंका है।

News Source – Jagran.com

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