India China Disengagement : बंकर हटाए, हैलीपेड तोड़ा, जानें कैसे पैंगॉन्ग से हो रही चीनी सैनिकों की वापसी

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चीन ने फिंगर 4 और फिंगर 5 के बीच 80 मीटर का साइनेज भी हटा लिया है। इस पर मंदारिन भाषा में संकेतक व मैप भी बने हुए थे। इसे ऐसा डिजाइन किया गया था कि यह आसमान से साफ रूप से दिख सके।

एलएसी पर भारत और चीन के बीच सैनिकों को पीछे बुलाने पर सहमति के बाद लद्दाख की पैंगॉन्ग झील के पास चीन ने अपना बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है। पूर्वी लद्दाख के पैंगांग सो (झील) के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से भारत और चीन की सेनाओं की वापसी प्रक्रिया योजना के मुताबिक चल रही है। अगले छह से सात दिनों में वापसी की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। समझौते के मुताबिक चीन को उत्तरी किनारे पर ‘फिंगर आठ’ के पूर्वी इलाकों की तरफ सैनिकों को लेकर जाना है। जबकि भारतीय सेना क्षेत्र में ‘फिंगर तीन’ के पास धन सिंह थापा पोस्ट स्थित स्थायी अड्डे पर लौटेगी। इसी तरह की कार्रवाई झील के दक्षिणी किनारे पर भी होगी।

हैलीपेड नष्ट किया, 80 मीटर का साइनेज भी हटाया
भारत ने चीन को इस बात पर सहमति के लिए मजबूर किया कि अप्रैल 2020 के बाद पीएलए ने फिंगर 8 से फिंगर 4 के बीच जो भी इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़े किए, उन्हें नष्ट किया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने उत्तरी किनारे वाले इलाकों से कई बंकर, अस्थायी चौकियां, हेलीपैड और अन्य ढांचों को हटा लिया है। चीनी सेना क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या धीरे-धीरे कम कर रही है। चीन ने फिंगर 4 और फिंगर 5 के बीच 80 मीटर का साइनेज भी हटा लिया है। इस पर मंदारिन भाषा में संकेतक व मैप भी बने हुए थे। इसे ऐसा डिजाइन किया गया था कि यह आसमान से साफ रूप से दिख सके।

ड्रोन व सैटेलाइट तस्वीरों से रखी जा रही नजर
रिपोर्ट के अनुसार दोनों पक्षों के फील्ड कमांडर लगभग रोजाना बैठक कर रहे हैं ताकि वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें, जिसे नौ दौर की उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता के बाद पिछले हफ्ते अंतिम रूप दिया गया था। पैंगांग सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से वापसी की प्रक्रिया के पूरा होने में लगभग एक हफ्ते का समय लगेगा और दोनों पक्ष सैनिकों एवं उपकरणों की वापसी प्रक्रिया का वेरिफाई कर रहे हैं। इसके लिए फिजिकल वेरिफिकेशन के साथ ही ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों की मदद ली जा रही है।

9 महीने के गतिरोध के बाद बनी सहमति
नौ महीने के गतिरोध के बाद दोनों देशों की सेनाएं पैंगांग सो के उत्तर और दक्षिण किनारों से वापसी पर रजामंद हुईं। इसके तहत दोनों पक्षों को ”चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित” तरीके से सेनाओं को अग्रिम मोर्चे से हटाना है। वापसी की प्रक्रिया 10 फरवरी को शुरू हुई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को संसद में वापसी समझौते पर विस्तृत बयान दिया था। सिंह ने कहा था कि चीन की सेना ने पिछले वर्ष ‘फिंगर चार’ और ‘फिंगर आठ’ के बीच कई बंकर और अन्य ढांचे बना लिए।

सैनिकों की वापसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी बैठक
नौ दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने विशेष रूप से जोर दिया कि चीन की सेना पैंगांग झील के उत्तरी किनारे पर ‘फिंगर 4’ और ‘फिंगर 8’ के बीच से हटे। रक्षा मंत्री सिंह ने संसद में कहा था कि पैंगांग झील इलाके से वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के 48 घंटे के भीतर दोनों पक्षों के वरिष्ठ कमांडरों की अगली बैठक पर सहमति बनी है ताकि शेष मुद्दों का भी समाधान निकाला जा सके।

जानें क्या है फिंगर का मतलब
इलाके में पहाड़ों की चोटियों को फिंगर नाम से जाना जाता है। लेक के पास फिंगर एरिया 8 हिस्सों में बंटा है। भारत फिंगर 8 तक तक के इलाके पर अपना दावा करता है। वहीं चीन ने पीएलए ने फिंगर 8 से फिंगर 4 के बीच कई इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़े कर दिए थे। साथ ही फिंगर चार से आगे भारतीय सैनिकों के गश्त पर भी रोक लगा दी थी।

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