India China Disengagement: ‘दो नहीं ढाई मोर्चे की लड़ाई को तैयार है भारतीय सेना’, बोले आर्मी चीफ नरवणे

पैंगोंग झील के सवाल पर सेना प्रमुख नरवणे ने कहा, ‘मुझे लगता है कि परिणाम अच्छा रहा, जो सभी के लिए लाभकारी है.’

लद्दाख में लंबे वक्त तक चले भारत-चीन गतिरोध (India China Disengagement) पर आर्मी चीफ जनरल नरवणे का बयान आया है. जनरल नरवणे ने कहा कि लद्दाख गतिरोध के दौरान पाकिस्तान और चीन के बीच सांठ-गांठ जैसा कोई संकेत नहीं मिला था. इसके साथ ही उन्होंने मुद्दे के सुलझने पर खुशी जाहिर की. वह बोले कि मुद्दे का सुलझना सभी के लिए लाभकारी है. सेना की लंबे वक्त की रणनीति पर बात करते हुए नरवणे ने कहा कि सेना दो मोर्चे नहीं ढाई मोर्च की लड़ाई के लिए तैयार है.

पैंगोंग झील से संबंधित सवाल के जवाब में सेना प्रमुख जनरल नरवणे (MM Naravane) ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा परिणाम रहा, यह सभी के लिए लाभकारी है. पड़ोसियों के तौर पर हम सीमा और शांति और अमन चाहते हैं.’ आर्मी चीफ ने आगे यह भी कहा कि चीन के साथ भारत का रिश्ता वैसा होगा जैसा हम चाहेंगे.

भारत और चीन के बीच पिछले साल पांच मई में पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक संघर्ष के बाद सैन्य गतिरोध शुरू हुआ था और इसके बाद दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों तथा घातक अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी. इसे अब कम करने पर सहमति बनी है और दोनों देशों की सेनाएं पीछे हो गई हैं.

‘ढाई मोर्चे की जंग को तैयार है सेना’

जनरल बिपिन रावत की तरह नरवणे ने भी ढाई मोर्चे का जिक्र किया. ढाई मोर्च का मतलब है कि भारतीय फौज एक साथ चीन और पाकिस्तान से तो टक्कर ले ही सकती है, साथ ही वह देश के अंदर होने वाली किसी भी उथल-पुथल से भी आसानी से निपट सकती है. इसमें चीन और पाकिस्तान दो मोर्चे हैं, और आंतरिक उथल-पुथल बाकी का आधा मोर्चा. इसमें कश्मीर, नॉर्थ ईस्ट का संकट या अन्य संकट शामिल हैं.

चीन को लगी है ये बुरी आदत

चीन को बहुत कम फायदे वाले बदलाव करके धीरे-धीरे आगे बढ़ने की आदत है. ऐसे बदलाव बहुत बड़े या बेहद कड़ी प्रतिक्रिया के लायक नहीं होते. बहुत कम फायदे वाले ऐसे कदमों का कभी विरोध नहीं किया गया, इसलिए वह बिना एक भी गोली चलाए या जीवन कुर्बान किए अपने लक्ष्यों को हासिल करता रहा है.

हमारे साथ नहीं चलेगा उसका ये पैंंतरा

मुझे लगता है कि किसी भी चीज से बढ़कर हमने जो हासिल किया है वह दिखाता है कि हमारे साथ यह रणनीति काम नहीं करेगी. उनके हर कदम का कड़ा जवाब दिया जाएगा. पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में देपसांग इलाके और उत्तरी सीमा से लगे अन्य क्षेत्रों में कुछ मुद्दे बाकी हैं. लेकिन उसके लिए हमारे पास रणनीति है. क्या हमारे पास भविष्य में बातचीत करने के लिए भी कुछ है. हां, निश्चित तौर पर, लेकिन वह रणनीति क्या होगी और समझौते पर क्या प्रगति होगी, यह देखना होगा.

Source – Tv 9 hindi

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