मॉस्को ओलिंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हॉकी स्टार रविंदर और कौशिक का कोविड-19 से निधन

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दो महान हॉकी खिलाड़ियों रविंदर पाल सिंह और एम.के. कौशिक का शनिवार को कोविड-19 से निधन हो गया। ये दोनों ही दिग्गज मॉस्को ओलिंपिक 1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे।

नई दिल्ली
मॉस्को ओलिंपिक 1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय हॉकी टीम के दो पूर्व खिलाड़ियों रविंदर पाल सिंह और एम.के. कौशिक का कोविड-19 से जूझने के बाद शनिवार को निधन हो गया। सिंह (60 वर्ष) ने लगभग दो सप्ताह तक इस बीमारी से जूझने के बाद लखनऊ में आखिरी सांस ली जबकि कौशिक (66 वर्ष) कोविड-19 से उबरने में नाकाम रहे। कौशिक ने भारत की सीनियर पुरुष और महिला टीमों को कोचिंग दी थी। उनके कोच रहते हुए भारतीय पुरुष टीम ने बैकाक एशियाई खेल 1998 में स्वर्ण पदक जीता था।

उनके परिवार में बेटा और पत्नी है। कौशिक को 17 अप्रैल को कोविड-19 के लिये पॉजिटिव पाया गया था और उन्हें यहां एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। उनके पुत्र एहसान ने कहा, ‘उन्हें आज सुबह वेंटीलेटर पर रखा गया लेकिन अभी उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।’ कौशिक में पिछले महीने इस बीमारी के लक्षण दिखे थे लेकिन उनका आरटीपीसीआर और आरएटी जांच नेगेटिव आयी थी। उनका सीटी स्कैन 24 अप्रैल को हुआ था जिसमें उनके कोविड निमोनिया से ग्रसित होने का पता चला था।

पिछले कुछ दिनों से उनकी स्थिति में ना सुधार हो रहा था ना ही उस में गिरावट दर्ज की जा रही थी। उनके ऑक्सीजन का स्तर हालांकि नीचे चला गया था। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ज्ञानेंद्रो निंगोंबम उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। हॉकी इंडिया से जारी विज्ञप्ति में उन्होंने कहा, ‘उनके निधन की खबर सुनकर हम बेहद दुखी हैं। हम कौशिक के परिवार और दोस्तों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। भारतीय हॉकी में उनका योगदान बेजोड़ है और वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।’

कोविड-19 पॉजिटिव होने के बाद कौशिक की पत्नी का इलाज भी इसी अस्पताल में चल रहा था लेकिन वह ठीक से उबर रही है। उन्हें 1998 में अर्जुन पुरस्कार और 2002 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले दिन में सिंह का निधन लखनऊ के विवेकानंद अस्पताल में हुआ था। सिंह को 24 अप्रैल को विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार वह कोरोना संक्रमण से उबर चुके थे और टेस्ट नेगेटिव आने के बाद कोरोना वॉर्ड से बाहर थे। शुक्रवार को उनकी हालत अचानक बिगड़ी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

लॉस एंजिलिस ओलिंपिक 1984 खेल चुके सिंह ने विवाह नहीं किया था। उनकी एक भतीजी प्रज्ञा यादव है। वह 1979 जूनियर विश्व कप भी खेले थे और हॉकी छोड़ने के बाद स्टेट बैंक से स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली थी। सीतापुर में जन्में सेंटर हाफ सिंह ने 1979 से 1984 के बीच शानदार प्रदर्शन किया। दो ओलिंपिक के अलावा वह 1980 और 1983 में चैम्पियंस ट्रोफी , 1982 विश्व कप और 1982 एशिया कप भी खेले।

खेलमंत्री किरन रिजिजू ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा ,‘मुझे यह जानकर अपार दुख हुआ है कि श्री रविंदर पाल सिंह जी कोरोना से जंग हार गए। भारत ने मॉस्को ओलिंपिक की स्वर्ण पदक विजेता हॉकी टीम का एक स्वर्णिम सदस्य खो दिया। भारतीय खेलों में उनके योगदान को याद रखा जायेगा।’ हॉकी इंडिया ने उनके असामयिक निधन पर शोक जताया है। निंगोंबम ने कहा, ‘हॉकी इंडिया रविंदर पाल सिंह के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता है। रविंदर ने भारतीय हॉकी में अपार योगदान दिया और उनकी उपलब्धियां हमेशा याद रखी जायेंगी। इस कठिन समय से उबरने के लिये उनके परिवार और दोस्तों को ईश्वर शक्ति दे।’

Source – navbharattimes

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